MALNUTRITION


कुपोषण क्या हैं

विश्व स्वास्थ्य संघठन के अनुसार 462 मिलियन लोग कुपोषण का शिकार हैं और 159 मिलियन बच्चे इससे प्रभावित हैं। 118 देशों में 140 मिलियन स्कूल के बच्चों और 7 मिलियन गर्भवती महिलाएं कुपोषण का शिकार बन रही हैं। व्यक्ति के स्वास्थ को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक शरीर को मिलने वाला पोषण हैं, क्योंकि शरीर को अच्छे स्वास्थ के लिए संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों और ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं। संतुलित आहार में जो आवश्यक तत्व होते हैं उनके नाम है : प्रोटीन, वसा, कार्बोहायड्रेट, विटामिन, फाइबर और जल। यह आवश्यकता उम्र, लिंग और जीवन शैली पर निर्भर करती हैं। कम या ज्यादा मात्रा में इन तत्वों को लेने से स्वास्थ्य पर बूरा प्रभाव पड़ सकता हैं। कुपोषण 2 कारण से हो सकता हैं :- पोषक तत्वों की कमी से या अधिकता से जिन्हें अल्प या अति पोषण कह सकते हैं ।

कुपोषण के प्रकार

कुपोषण का कारण सिर्फ पोषक तत्वों की कमी होना ही नहीं बल्कि अधिक मात्रा में लेना भी हो सकता हैं‍। कुपोषण निम्न प्रकार के हो सकते हैं:

तीव्र कुपोषण (एक्यूट मालन्यूट्रिशन) – जब वजन में बहुत ज्यादा कमी आती हैं, तब ये कुपोषण होता हैं। इसके कारण 3 प्रकार के कुपोषण संभव है

मरसेमस– इस बीमारी में शरीर में वसा तेजी से कम होने लगती हैं, और ऊतक (टिश्यू) भयंकर ख़राब होने लगते हैं। इसके कारण शरीर का प्रतिरक्षा तन्त्र कमजोर होने लगता हैं।

क्वाशियोरकोर – इस बीमारी में बॉडी फ्लूइड शरीर से बाहर नहीं निकल पाता हैं, जिस कारण स्किन और बालों के रंग में परिवर्तन आने लगता हैं, मोटापा, डायरिया, मसल मॉस का कम होना,रोग प्रतिरक्षा तन्त्र का कमजोर होना, वजन बढ़ना और विकास अवरुद्ध होना, घुटनों, पैरो और शरीर के निचले हिस्से में सुजन होना भी इसके लक्ष्ण  है।

मर्सेमिक क्वाशियोकोर– यह मरसेमस और क्वाशियोकोर का मिश्रित रूप हैं जिसमे दोनों रोगों के लक्ष्ण दिखाई देते है।

कुपोषण के कारण (Malnutrition causes)

किसी भी देश या शहर में यदि बड़े पैमाने पर लोग कुपोषण से ग्रस्त होते हैं, तो इसके कई कारण हो सकते हैं जिनमें आर्थिक,सामजिक और राजनीतिक कारण संभव हैं :-

सामजिक स्थिति
कुपोषण का कारण सिर्फ पोषण की अधिकता या कमी ही नहीं हैं बल्कि यह सामजिक स्थिति से भी  प्रभावित होता हैं। जैसे की जनसंख्या-वृद्धि से भी यह संभव हैं, जिसमे समाज के एक हिस्से को ही सभी पोषण मिलने लगता हैं। और दूसरा पक्ष कुपोषण का शिकार होने लगता हैं। इसी तरह युद्ध के समय भी कुपोषण की संभावना बढ़ जाती हैं और बड़े होते बच्चों में भी यह समस्या दिखना आम हैं।

भुखमरी
विश्व खाध्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार लगभग 1.02 बिलियन लोग विश्व भर में कुपोषण और भुखमरी का शिकार है। इसका मतलब हैं कि हर  6 में से 1 व्यक्ति आवश्यक भोजन और स्वस्थ जीवन नहीं जी पाता हैं। इस कारण भुखमरी और कुपोषण विश्व भर में स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्यायों में सबसे ऊपर हैं यहाँ तक की AIDS, मलेरिया और ट्यूबरकुलोसिस तीनों को मिलाकर देखे तो इनसे भी ज्यादा ये गंभीर हैं। प्राकृतिक आपदा, गरीबी, कृषि में कमी और पर्यावरण का अत्यधिक शोषण भी एक कारण हैं।

कुपोषण के लक्षण और पहचान (Malnutrition diseases symptoms)

प्रारम्भिक लक्षणों को पहचान कर यदि समय पर उपचार मिल जाए तो कुपोषण की समस्या को कम किया जा सकता है। इसे पहचानने के लिए कई तरीके उपलब्ध हैं जिनमे मालन्यूट्रीशन युनिवर्सल स्क्रीनिंग टूल (MUST) प्रमुख हैं, यह कुपोषण ग्रस्त वयस्कों को पहचानने के लिए बनाया गया हैं यह 5 चरण का प्लान है:

प्रथम चरण : लम्बाई और वजन को नापकर बॉडी मास इंडेक्स निकालकर स्कोर देखना होता हैं।

दूसरा चरण: बिना किसी योजना के कम हुए वजन को नोट करते हैं और स्कोर देखते हैं। जैसे की सामन्य जीवन में बिना किसी प्रयास के ही 5 से 10 % तक वजन में कमी आना स्कोर को 1 करता हैं लेकिन 10 % तक वजन कम होना स्कोर को 2 करता हैं।

तीसरा चरण : मानसिक और शारीरिक स्थिति देखकर स्कोर तय किये जाते हैं। जैसे की यदि व्यक्ति लगतार बीमार है और लगातार 5 दिन से भोजन नहीं ले रहा तो स्कोर 3 होंगे।

चतुर्थ चरण: ऊपर के तीनों चरणों के स्कोर को जोडकर कुल रिस्क स्कोर निकाला जाता हैं।

पांचवा चरण: अब देख-रेख का प्लान बनाने के लिए निकटतम दिशा-निर्देश की मदद लेनी होती हैं। यदि व्यक्ति कुपोषण के न्यूनतम रिस्क पर हैं तो स्कोर 0 होगा लेकिन स्कोर के 1 होने का मतलब हैं कि रोग होने की संभावना हैं और 2 से ज्यादा होने का मतलब है कि
रोगी बहुत बड़ी रिस्क में हैं।

उपचार

MUST की सहायता से स्क्रीनिंग करने के बाद उपचार की प्रक्रिया शुरू होता हैं। कम रिस्क पर अस्पताल या घर पर ही पोषक आहार लेना शुरू किया जा सकता हैं। इससे थोडा ज्यादा होने पर 3 दिन के लिए आहार का निर्धारण किया जाता हैं। और ज्यादा रिस्क होने पर व्यक्ति को आहार विशेषज्ञ से उपचार लेना पड़ता हैं उपचार का प्रकार कुपोषण की गंभीरता पर निर्भर करता हैं। जो कि संभव हैं  शुरूआती स्तर से लेकर भयंकर गंभीर स्थिति तक हो सकती हैं। इसके लिए डाईटीशियन आहार में कुछ परिवर्तन करता हैं जिसमें यह सुनिश्चित किया जाता हैं पर्याप्त पोषक तत्वों युक्त आहार हो। इसके लिए संतुलित आहार दिया जाता हैं। फोर्टीफाईड भोजन जिसमें अतिरिक्त पोषक तत्व हो वो दिया जाता हैं, कैलोरी युक्त पेय पदार्थ दिए जाते हैं। रेडी टू यूज फ़ूड (RUTFs) का उपयोग भी कुपोषण के बच्चो के लिए किया जाने लगा हैं,भयंकर कुपोषण की स्थिति में यह भोजन काफी फायदा पहुंचाता हैं।

कुपोषण और बीमारी के लक्षण

कुपोषण एक आहार में महत्वपूर्ण पोषक तत्व, विटामिन और खनिज की कमी से परिणाम है। लंबे समय से अधिक या यहां तक कि एक अल्पकालिक पर यह करने के लिए गंभीर दुर्बलता का नेतृत्व और शरीर के महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए नुकसान कर सकते हैं। 1-7 कुपोषण और बीमारी के लक्षण दोनों वयस्क और बच्चों के बीच आसानी से साफ़ कर रहे हैं। वे इस प्रकार रेखांकित किया कर सकते हैं।

वयस्कों में कुपोषण और बीमारी के लक्षण

सबसे आम लक्षण एक उल्लेखनीय वजन में कमी है। उदाहरण के लिए, जो तीन महीनों के दौरान अपने शरीर के वजन के अधिक से अधिक 10% खो दिया है और नहीं परहेज़ हैं कुपोषण के शिकार हो सकता है। यह आम तौर पर शरीर मास इंडेक्स या बीएमआई का उपयोग करके मापा जाता है। इस ऊंचाई मीटर चुकता में द्वारा विभाजित किलोग्राम में वजन द्वारा परिकलित की जाती है। वयस्कों के लिए एक स्वस्थ बीएमआई सामान्यत: 18.5 और 24.9 के बीच झूठ।

17 और 18.5 के बीच एक बीएमआई के साथ उन mildly कुपोषण के शिकार हो सकता, BMIs 16 और 18 के बीच के साथ उन मामूली कुपोषण के शिकार हो सकता और एक बीएमआई 16 से कम के साथ उन बुरी तरह कुपोषण के शिकार हो सकता है।

अन्य लक्षणों में शामिल हैं:

• मांसपेशियों और थकान की कमजोरी। शरीर की मांसपेशियों दूर बर्बाद करने के लिए दिखाई देते हैं और दैनिक गतिविधियों के लिए बाहर ले जाने के लिए पर्याप्त शक्ति के बिना छोड़ा जा सकता है।
• थकान के बहुत से लोग शिकायत करते हैं पूरे दिन और ऊर्जा की कमी है। यह भी एनीमिया द्वारा कुपोषण के कारण के कारण हो सकता है।
• संक्रमणों के लिए बढ़ा खतरा।
• यहां तक कि छोटे घावों और कटौती की देरी और लंबे समय तक चिकित्सा।
• चिड़चिड़ापन और चक्कर आना।
• त्वचा और बालों शुष्क हो जाता है। त्वचा सूखी, और परतदार दिखाई दे सकते हैं और बाल बारी सूखी, बेजान, सुस्त और भूसे की तरह प्रकट हो सकता है। नाखून भंगुर प्रकट होते हैं और आसानी से तोड़ कर सकते हैं।
• कुछ रोगियों लगातार दस्त या दीर्घकालिक कब्ज से ग्रस्त हैं।
• माहवारी अनियमित या कुपोषण के शिकार महिलाओं में पूरी तरह से बंद हो सकता है।
• अवसाद में कुपोषण आम है। यह दोनों एक कारण के रूप में अच्छी तरह कुपोषण का असर हो सकताहै।

बच्चों में कुपोषण और बीमारी के लक्षण

बच्चों में कुपोषण और बीमारी के लक्षणों में शामिल हैं:
• विकास में विफलता। यह एक सामान्य उम्मीद की दर पर वजन, ऊँचाई या दोनों के संदर्भ में विकसित करने के लिए विफलता के रूप में प्रकट हो सकते हैं।
• चिड़चिड़ापन, मंदी और चिंता की तरह व्यवहार में बदलाव के साथ अत्यधिक रोना रोने, ध्यान घाटे कुपोषण के साथ बच्चों में आम है।
• त्वचा सूखी और परतदार हो जाता है और बाल सूखी, सुस्त और पुआल में उपस्थिति की तरह बदल सकते हैं। इसके अलावा, बालों के झड़ने रूप में अच्छी तरह से हो सकता है।
• मांसपेशियों में शक्ति का अभाव। अंग छड़ी की तरह प्रकट हो सकता है।

भारत में कुपोषण

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि भारत में हर साल कुपोषण के कारण मरने वाले पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों की संख्या दस लाख से भी ज्यादा है। दक्षिण एशिया में भारत कुपोषण के मामले में सबसे बुरी हालत में है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में किए गए सर्वेक्षणों में पाया गया कि देश के सबसे गरीब इलाकों में आज भी बच्चे भुखमरी के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इस ओर ध्यान दिया जाए तो इन मौतों को रोका जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने भारत में जो आंकड़े पाए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय स्तर से कई गुना ज्यादा हैं. संयुक्त राष्ट्र ने स्थिति को “चिंताजनक” बताया है।


बीमारी के लक्षण