TOBACCO CESSATION


रुपरेखा :- Contents

  1. परिचय :- क्या है तम्बाकू
  2. तम्बाकू का इतिहास
  3. तम्बाकू का उत्पाद
  4. युवा वर्ग में तम्बाकू की लत
  5. तम्बाकू रोकथाम की जरुरत
  6. तम्बाकू सेवन से होने वाली बीमारिया
  7. तम्बाकू से बचने के उपाय
  8. तम्बाकू सेवन से मुँह में बीमारिया हो तो क्या करे ?
  9. नशा छुड़ाने के उपाय
  10. नशा एवं तम्बाकू का भयानक स्वरुप
  11. नशा एवं तम्बाकू सेवन न करते तो क्या होता हमारे पास
  12. तम्बाकू से सबसे ज्यादा मुख का कर्क भी होता है
  13. जो तम्बाकू छोड़ना चाहते है उनके लिए सलाह
  14. निष्कर्ष

क्या है तम्बाकू ?

आज के युग में तम्बाकू हमारे समाज की बहुत बड़ी बिमारियों की मात्रा बन के समाज के हर युवा एवं बुजुर्ग को खोखला कर रही है| तम्बाकू पेड़ के पत्तो को सूखा कर जो की एक प्रकार के निकोटियाना नाम की प्रजाति होती है उसकी पत्तियों में निकोटिन नामक मादक पदार्थ होता है| इन्हीं पौधों की पत्तियों को सूखा कर इनमे नशा करने की विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाये जाते है|

तम्बाकू एक मीठे जहर की तरह होती है जो इसको सेवन करने वाले व्यक्ति की धीरे -धीरे जान ले लेती है उस व्यक्ति जीवन शक्ति का हास होता जाता है कुछ समय बाद उस व्यक्ति को और उसके परिवार, रिश्तेदारों को पता चल जाता है कि तम्बाकू का सेवन हानिकारक है बाद में तम्बाकू कि ऐसी लत लग जाती है कि वह व्यक्ति यदि छोड़ना भी चाहे तो बड़ा मुश्किल होता है लेकिन अगर कोशिश करें डाक्टरों कि सलाह लें समय – समय पर डाक्टरों के संपर्क में रहे तो तम्बाकू कि लत से छुटकारा पाया जा सकता है|

तम्बाकू सेवन करने वाले व्यक्तियों में धीरे -धीरे जीवन कि शक्तिया कम होती जाती है अनेक प्रकार की बीमारियों का घर सा हो जाता है शरीर और वह व्यक्ति अपने को एक तरह से विनाश के हवाले कर देता है| और वह व्यक्ति अपने आप को अपने समाज परिवार और रिश्तेदारों से दूर भागने लगता है |तम्बाकू कि तरह ही हमारे समाज के युवा एवं बुजुर्ग गांजा नाम के मादक पदार्थ का सेवन करते हैं |

जो गांजे के पौधे के मादा पौधे के फूल और पत्तियों तथा तने को सुखा कर बनाया जाता है |जिसको हमारे गावों में चिलम (goniya device ) में भर कर के धूम्रपान करते हैं| कुछ प्राचीन समाजो को गांजा की अवषधियों एवं मनोसक्रिय गुण पता थे तथा इसका उपयोग बहुत पुराने समय से लगातार आता रहा है आज के युग में लोगों ने इसे सस्ते नशे का आधार बना लिया है जो अक्सर हमारे गावों में देखने को मिल जाता है|शहरों में गांजे को हमारे युवा हुक्का के रूप में उपयोग में लाते है जिसमे विभिन्न प्रकार के स्वाद वाले गांजे का प्रयोग करते है जो शरीर के विभिन्न अंगो को नुकसान पहुंचता है|

“तम्बाकू का इतिहास “

500 साल पहले सन 1492 में जब क्रिस्टोफर कोलम्बस ने अमेरिका की खोज की थी तो उसने ही तम्बाकू का लोगों को परिचय कराया था लोगों को उसके बारे में बताया था भारत में सबसे पहले तम्बाकू के अरे में पुर्तगालियों ने (1608 ईo )बताया था और इसको सबसे पहले बादशाह अकबर को इसका सेवन लत लगाई थी बादशाह अकबर ने ही हुक्का का अविष्कार किया था लोगो को बताया था तथा उसका उपयोग किया करता था और हुक्के की लत पुरे विश्व में आग की तरह से फ़ैल गई| जल्दी में ही हुक्का का प्रचलन अमीरों की पहचान बनने लगा जो आज हमारे समाज के यवाओं को बर्बाद कर रहा है|पुरे संसार में तम्बाकू से लगभग 6 मिलियन लोगों की मृत्यु होती है|भारत विश्व के उत्पादक का लगभग 7.8 प्रतिशत तम्बाकू उत्पन्न करता है|तम्बाकू दक्षिणी अमेरिका का पौधा माना जाता है इसकी खेती ऐतिहासिक काल से होती चली आ रही है| इसकी खेती हर जगह विभिन्न प्रकार की भूमि तथा जलवायु के अनुकूल बना लेती है|

“तम्बाकू के विभिन्न उत्पाद “

भारत में विभिन्न प्रकार के तम्बाकू के उत्पाद अनेक कंपनियों द्वारा किये जाते हैं ये उत्पाद दो तरह के होते हैं
1 धूम्रपान रहित तम्बाकू
2 धूम्रपान तम्बाकू
3 बिना धुंये वाले उत्पाद
पान , तम्बाकू , गुटका , खैनी , ज़रदा , मैनपुरी
4 धुंये वाले उत्पाद
बीड़ी , चिलम , सिगरेट , हुक्का , धुमती , नशावर

वर्तमान में धूम्रपान की सबसे प्रचलित विधि सिगरेट है जो मुख्या रूप से उद्योगों द्वारा निर्मित होती है | किन्तु खुले तम्बाकू तथा कागज को गोल करके भी बनाई जाती है धूम्रपान के अन्य साधनों में पाइप , सिगार , हुक्का एवं बांस ज्यादा प्रचलित है |धूम्रपान से सम्बंधित बीमारियां सभी दीर्घकालिक धूम्रपान करने वालो में से आधे से ज्यादा लोगों की मृत्यु बहुत कम उम्र में ही हो जाती है |2007 की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक वर्ष दुंनिया भर में 4.9 मिलियन लोग धूम्रपान की वजह से मरते हैं |

तम्बाकू की लत

जहाँ पर पूरा देश एक नै सोच लेकर भारत को विकाशशील से विकसित देशों की श्रेणी में लाना चाह रहा है वहीं पर हमारे समाज के युवाओं का तम्बाकू जैसी घातक वास्तु अपने चपेट में ले रही है वो युवा जो अभी नई उम्र की है और उनमे कुछ करने की इच्छा है कुछ नया सोचने की शक्ति है वो युवा पर बस एक बार किसी बुरी संगति के चपेट में आ जाये तो एक लत की शिकार होती है| हमारे युवाओं में तम्बाकू की लत किसी संसथान में अपने कुछ मित्रो से एक मात्र मीठी सुपारी के दाने से शुरू होकर वह एक तम्बाकू के विभिन्न प्रकार के तम्बाकू उत्पाद पर ही नहीं अपितु चरस पर भी नहीं रूकती‍‍‍।

यह लत युवा को कही पर अच्छा प्रदर्शन न करने की वजह या घर या बुजुर्गों के संपर्क में न आने से होती है जो हमारे युवाओं को झकझोर देता है एक घातक बीमारी का रूप दे देती है|ज्यादातर लोग तम्बाकू की हानि की सीमा को नहीं जानते तब भी जबकि उन्हें कुछ जानकारी हो कि यह सवास्थय के प्रति खतरा है तम्बाकू कम्पनियाँ उसे आकर्षित बनाने के लिए तथा अन्य विज्ञापनों के रूप में हथकंडे अपनाती है तथा साथ ही साथ तम्बाकू स्वस्थ के साथ किस प्रकार खिलवाड़ करती है इस कटु सत्य से ध्यान हटती है यह सिद्ध किया जा चूका है कि पैकेजिंग पर तम्बाकू सेवन के सच्चाई बताने का सस्ता तथा शक्तिशाली तरीका है तम्बाकू सेवन के नुकसान से सम्बंधित चेतावनी के चित्र खतरों को बताने तथा कि जैसे कि सेवन छोड़ने या कम करने के लिए व्यावहारिक बदलाव के लिए प्रत्याशित करने में विशेष रूप से प्रभावी होते हैं

अब जैसे तमाम कम्पनियाँ अपने उत्पाद पर लिखती हैं tobacco kills या तम्बाकू से कैंसर (कर्क) होता है तो यह वो लोग कैसे जानेंगे जो लोग पढ़े लिखे नहीं है और ज्यादातर गावों में तम्बाकू का सेवन अशिक्षित लोग ही करते हैं| एक ऐसे उत्पाद के लिए महत्वपूर्ण बात जिनके नए उपयोग करता युवा तथा छवि ब्रांड के प्रति सचेत होते हैं इस खतरे के विरुद्ध तथा देशों से कार्यवाही के जवाब में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस 2009 अभियान निम्न मुख्य सन्देश पर केंद्रित है तम्बाकू के पैकेटों पर स्वास्थ चेतावनियां जिनमे लिखित तथा चित्र के रूप में शामिल हैं तम्बाकू सेवन से स्वास्थ को गंभीर खतरों के प्रति जान जागरण बढ़ाने तथा तम्बाकू सेवन कम करने के लिए अत्यंत कम खर्चीले व प्रभावी तरीके हैं |

तम्बाकू रोकथाम कि जरुरत

भारत में तम्बाकू नियंत्रण पर रिपोर्ट 2005 के अनुसार भारत में प्रति वर्ष तम्बाकू सेवन करने से 8 – 9 लाख मौत होती है | पुन: भारतीय चिकित्साह अनुसन्धान द्वारा वर्ष 2005 तक प्रकाशिक साहित्य के विश्लेषण के आधार पर गैर संचरणीय रोगो के कारन बोझ का आकलन शीर्षक के अनुसार तम्बाकू का सेवन करने के कारन

  1. हृदयघात (Heart – Attack) 78 % तपेदिक 65 .6 % इस्केमिक ह्रदय आघात -78 %
  2. Sever myocardial infarction – 52 %
  3. Esophageal Cancer -43 %
  4. मुंह का कर्क (कैंसर)-38 %
  5. फेंफड़े का कर्क -16 %

के जोखिम हैं तम्बाकू का धूम्रपान और साथ ही इसे चबाकर सेवन करने से प्रतिकूल सवास्थ परिणाम सामने आते हैं और अकाल अथवा समय से पहले मृत्यु हो जाती है | देश में तम्बाकू उत्पादों कि खपत तथा धूम्रपान रोक के लिए भारत सरकार तथा निजी संसथान ठोस कदम उठाते हैं |

सेकेण्ड हैण्ड स्मोक (SHS)

यह धूम्रपान का ऐसा तरीका है जिसमे धूम्रपान करने वाला व्यक्ति अथवा धूम्रपान का सिगरेट, बीड़ी, सिगार आदि के जलने वाले सिरे कि ओर से किया जाता है |

क्यों खतरनाक है SHS ?

इससे युवाओं में फेफड़ो का कैंसर और ह्रदय रोग बच्चों में अचानक नवजात मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) चिर कलिक स्वशन संक्रमण गंभीर अस्थमा फेफड़ों का पूरी तरह कार्य न करना ,कान के अंदर के रोग और स्वास सम्बन्धी गंभीर रोग ,मुंह के तमाम तरह के कैंसर तथा रोग हो जाते हैं |घर पर धूम्रपान करने के साथ – साथ अन्य व्यस्क विशेषकर महिलाएं प्रभावित होती हैं |

थर्ड हैण्ड स्मोक (THS)

यह ऐसा तम्बाकू धूम्रपा संदूषण है जो कि बीड़ी सिगरेट को बुझने के बाद भी बना रहता है |तम्बाकू के धुंए के अपशिष्ट को फेंकने वाली जगह पर लम्बे समय तक बने रहते हैं जो कि सवास्थ के लिए एक संभावित खतरा है इससे कम आयु के बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा होता है

क्या है SLT ?

इसका मतलब यह है कि तम्बाकू के ऐसे उत्पाद जो धुंआ रहित है इनमे ऐसे सभी उत्पाद शामिल हैं जिनका सेवन बिना जलाये रूप में किया जाता है |धुआँ रहित तम्बाकू का सेवन मुंह से अथवा सूंघकर किया जाता है |
भारत में धुंआ रहित तम्बाकू का सेवन चबाकर चूने के साथ अथवा चूने के बिना किया जाता है गुटखा, खैनी, जर्दा ऐसे ही कुछ उदाहरण है |
अतः इन तमाम बिंदुओं और बिमारियों कि वजह से जो हमारे समाज का नास ,क्षति हो रही है इससे जरुरी बनता है कि हमें ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारत का तम्बाकू रोकथाम की कोशिश करना चाहिए |

क्या है C O P T A ?

इसका आशय सिगरेट तथा अन्य तम्बाकू उत्पादों (विज्ञापनों का निषेध और व्यापर और वाणिज्य ,उत्पादन आपूर्ति और वितरण का विनियमन ) अधिनियम 2003 है यह अधिनियम किसी भी रूप में तम्बाकू रखने वाले सभी उत्पादों पर लागू है जिसका विवरण अधिनियम की अनुसूची में दिया गया है यह अधिनियम‍‍‍‍‍‍‍‍‍ ‍।जम्मू एवं कश्मीर राज्य सहित पुरे भारत वर्ष में लागू है |

तम्बाकू सेवन से मुख एवं अन्य अंगों में होने वाली बीमारिया

  1. मुख का कर्क
  2. होठों का कर्क
  3. मसूड़ों का कर्क
  4. श्वशन तंत्र सम्बन्धी रोगो खांसी , दमा , एग्ज़ीमा
  5. फेफड़े ,किडनी , गॉलब्लेडर का कर्क
  6. ह्रदय रोग , रक्तचाप ,वक्षघात,पेट के रोग
  7. अंधापन , बहरापन ,थायराइड
  8. स्मरण शक्ति कमजोर होना
  9. अँगुलियों का घिरना (गेंग्रीन)
  10. हड्डियों का कमजोर होना
  11. भूख की कमी
  12. नपुंसकता
  13. शराब से होने वाली बीमारियां
  14. लीवर , यकृति बढ़ जाना
  15. पेप्टिक अल्सर
  16. हिपेटाइटिस
  17. विटामिन्स की कमी
  18. पीलिया
  19. कोमा , बेहोशी
  20. सिरोसिस आफ लीवर
  21. उच्च रक्तताप
  22. पेट में पानी का भरना
  23. अम्लीय शून्यता -विषाक्ता
  24. कुपोषण
  25. आर्थिक बदहाली
  26. हाथ – पांव का लड़खड़ाना

फेंफड़ो कि बीमारी

क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और इम्फीसेमा ऐसी बढ़ने वाली बीमारियां हैं जो धूम्रपान करने वालों को होती है ये बीमारियां कभी ठीक नहीं होती | इनकी वजह से साँस लेना दुश्वार होता है फेफड़ों में रूकावट के कारन साँस लेना दुश्वार होता चला जाता है |क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव लांग ऐसी वीमारी है जो कभी भी धूम्रपान से दूर रहने वालों को नहीं होती इस बीमारी से मरने वालों की 80 % लोग धूम्रपान के कारन मरते हैं |

निमोनिया धूम्रपान करने वालों को होने वाली एक आम बीमारी है जो अक्सर घातक साबित होती है | अध्ययन के मुताबिक जिन्होंने 15 साल की उम्र या उससे पहले धूम्रपान करना शुरू किया है उन्हें फेंफड़ो के कैंसर का जोखिम उन लोगों की अपेक्षा में अधिक होता है जिन्होंने धूम्रपान 20 साल की उम्र के बाद धूम्रपान शुरू किया |मुँह के कैंसर के 90 % मरीज या तो धूम्रपान करते थे या फिर किसी रूप में तम्बाकू खाते थे

तम्बाकू में मादकता या उत्तेजना प्रदान करने वाला सबसे हानिकारक तत्व निकोटिन पाया जाता है इसकी मात्रा शरीर में बढ़ जाने से यह मृत्युदूत की तरह काम करता है रिसर्च से पता चला है कि तम्बाकू में 28 तरह कि कार्सिनोजेनिक तत्व होते हैं जिनसे कैंसर हो सकता है इनमे निकोटिन तथा कार्बन मोनोऑक्साइड गैस मुख्यतः पायी जाती हैं तम्बाकू से Co गैस शरीर में O2 को कम कर देती है जिससे शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग जैसे दिमाग , ह्रदय फेफड़े ठीक तरह से काम करना बंद कर दी है जिससे रक्तचाप भी बढ़ जाता है जिससे दिल का दौरा पड़ने कि सम्भावना बढ़ जाती है इन दोनों के आलावा तम्बाकू में कैंसर उत्पन्न करने वाले अनेक तत्त्व तथा रसायन पाए जाते हैं |

जैसे कि तर ,मार्श गैस ,अमोनिया गैस ,कोलोडॉन ,पापरीडिन , फास्फोरस , प्रोटीन अम्ल ,परफैरोल ऐजालिन ,सायनोजिन ,कर्नेलिक एसिड ,बेंजीन आदि |

तम्बाकू से मुंह का कैंसर

कैंसर होने के कारणों में सबसे बड़ा योगदान तम्बाकू का ही होता है तम्बाकू के सेवन से अनेक प्रकार के होने वाले रोगों में मुँह का कैंसर प्रमुख है इसके बाद गले तथा स्वसन नली का कैंसर होता हैं

    1. तम्बाकू में पाए जाने वाले फास्फोरस प्रतीक अम्ल के कारन टी बी रोग होता है
    2. तम्बाकू में पाए जाने वाले परफैरोल के कारण दॉत पिले ,मैले और ल्यूकोप्लेकिया रोग के कारन आपके दन्त और मंसूड़े सड़ने लगते हैं |

तम्बाकू का ज्यादा नशा करने से स्वाद न सुघने की शक्ति प्रभावित होती है इसके ज्यादा सेवन से मुँह से दुर्गन्ध आती रहती है | साथ ही हमारी लार ग्रंथि भी बहुत ज्यादा प्रभावित होती हैं जिसके फलस्वरूप भोजन के पाचन में परेशानी होने लगती है | 2016 -17 सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 28 .6 फ़ीसदी व्यस्क आबादी तम्बाकू के लत से ग्रसित है जिससे 18 % व्यस्क होते हैं |

कैसे तम्बाकू चबाना छोड़े ?तम्बाकू एक ऐसा खतरनाक प्रोडेक्ट होता है जिसे चबाने की वजह से कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं जिनमें है ब्लड प्रेशर , दिल की बीमारी , स्ट्रोक होने का बढ़ा हुआ रिस्क , ल्यूकोप्लेकिया और कैंसर होना शामिल है तम्बाकू चबाने की आदत को छोड़ना काफी मुश्किल हो सकता है लेकिन नामुमकिन नहीं लेकिन इसके बदलने में आपको जो लाभ मिलेगा वो इसके लायक होंगे

तम्बाकू छोड़ने के लिए प्लान बनाकर उसका पालन करें जैसे –

प्लान 1 :-इसे छोड़ने के लिए एक तारीख सेट करें
तम्बाकू छोड़ने के लिए एक तारीख सुनिश्चित कर लें आपको आने वाले दिनों के लिए खुद को शारीरिक और मानसिक तैयार होने का वक्त मिल जायेगा उसके बाद लगभग एक महीने की तारीख चुने की आप अपनी की हुई ढृढ़ शक्ति खो दे अपने संकल्प को ही खो दे जो अपने प्लान को सेट करके चलते हैं वो आगे जाकर बहुत आसानी से इस आदत को छोड़ पाते हैं और स्मोक फ्री बने रहते हैं |

प्लान -2 :-तम्बाकू छोड़ने में मदद पाने के लिए एक शेड्यूल तैयार करें आप अभी कितनी मात्रा में तम्बाकू का सेवन करते हैं अपने शेड्यूल को इसी पर आधारित रखें फिर धीरे -धीरे इसकी मात्रा को कम करते जाएँ और खुद ही इसका आदि बनने के से रोकने के लिए केलिन्डर का उपयोग करते हुए मुक्ति दीवस के बीच की डेट चुन ले
उदाहरण के लिए आप एक दिन में एक पैकेट इस्तेमाल करते हो तो अभी हर दो दिन में पैकेट यूज करना शुरू कर दे ऐसे ऐसे 4 दिन में एक पैकेट 8 दिन में एक पैकेट जितना संभव हो उतना कम खाना शुरु कर दें कुछ एक बोर्ड बना ले और उस पर कुछ तम्बाकू छोड़ने के कारन भी लिखें

तम्बाकू छोड़ने के कारण
1 ————————————
2 ————————————
3 ————————————
4 ————————————

प्लान 3:-तम्बाकू छोड़ने के लिए आप ऐसी जगहों पर जायें जहाँ तम्बाकू के घातक रोगों से लोग ग्रसित हो फिर आप अपने चार्ट पर तम्बाकू छोड़ने का कारण रोज रोज लिखे और देखें भी |अतः इन प्लान को फॉलो करके तम्बाकू लत से छुटकारा पाया जा सकता है|

पलान 4 :-कुछ खास जगहों पर नहीं चबाने का फैसला करें|

प्लान 5:-इसके पीछे के प्रेरक को पहचाने|

प्लान 6:-चबाने के किसी और विकल्प को पास में रखें|

प्लान 7:-तम्बाकू छोड़ने में मदद पाने के लिए दवाइयों का इस्तेमाल करें और अच्छे दन्त चिकित्सक से संपर्क करे|

प्लान 8 :-उन सभी दैनिक आदतें को बदल दे जो आपके तम्बाकू चबाने की याद दिलाती है|

प्लान 9 :-जरुरत पड़ने पर अपने आप को कुछ अकेला वक्त दे |

प्लान 10:-अपने तम्बाकू के प्रेरक से दुरी बनाये रखे |

प्लान 11:-ऐसे लोगो का स्पोर्ट ग्रुप ज्वाइन कर ले जो आपके संघर्ष समझते हैं |

प्लान 12:-चिंता और उबरने के लक्षणों के ऊपर मदद पाने के लिए किसी थरेपिस्ट से बात करें

दे रहा भारत देश तरक्की की मिशालें
युवा कर कर नशे का व्यापर
मौत खड़ी है उन्हीं युवाओ के द्वार
लुप्त हो रही संस्कृति हमारी जिसका था गुमान
मीठा एक जहर है नशा
जिसको पीते खाते ले स्वाद
जहर बन चूका है खून रंगो में आज के नौजवानो का
मिल जाते हैं अक्सर ,आज कल युवा मैखानों में
गिर गए नाले पर फिर भी सहने ऊँची हैं
बच्चो का क्या होगा ये बाटे किसने सोची हैं
चरस गांजा भांग और अफीम ये सब बर्बादी है
नहीं बदले खुद को तो तुम पर मौत भारी है
रो रहीं मताये बहने ये नशा कैसी बीमारीं है
न कोई नशे का धर्म ना ईमान
टूटता शरीर हो जाता बेजान
सबको मिलकर यह कदम उठाना होगा
देश को अपने नशामुक्त बनाना होगा
एक ही लक्ष्य है अपना नशा मुक्त देश हो
खुशियां हो चरों ओर नशा कोसों दूर हो
नशा एक बीमारी है पल रही महामारी है
निजात इससे पाना है
आने बच्चो को नशा मुक्त बनाना है |